Environment और इंसानी शरीर के लिए 5G कितना खतरनाक है? | 5G की रेडिओ वेव Frequency

हेलो दोस्तों, जल्द ही 5G नेटवर्क की टेस्टिंग भारत में सुरु कर दी जाएगी लेकिन क्या आप जानते है हमारे  Environment और इंसानी शरीर के लिए 5G कितना खतरनाक है? और यह क्या क्या नुकसान कर सकता है आज हम 5G नेटवर्क से जुडी सभी फायदों और नुकसान के बारे में बात करेंगे। 

5G से होने वाले नुकसान और खतरों को जानने से पहले हमें यह जानना होगा की 5G क्या है? और कैसे काम करता है बिलकुल ही आसान शब्दो में कहु तो 5G एक विशाल तेज नेटवर्क है जिसकी सहायता से कोई भी ऑनलाइन काम तुरंत ही कर पाएंगे जैसे किसी भी 3 घंटे की मूवी को सिर्फ कुछ सेकंड्स में ही डाउनलोड कर सकेंगे।

नेटवर्क की बढ़ती रेडियो तरंगे जो हो सकते है खतरनाक?

5G नेटवर्क हो या 4G, 2G, 1G  सभी नेटवर्क से कुछ तरंगे बहार निकलती है जिसे रेडियो वेव भी कहा जाता है और इन 1G, 2G, 3G, 4G, 5G को नेटवर्क का जनरेशन कहा जाता है पहले 1G नेटवर्क हमें 1982 में देखने को मिला था जिसकी Carrier Frequency 30Khz और Operating Frequency 800MHz सबसे कम होने के कारण 2.4Kbps का ही स्पीड मिला करता था,

धीरे धीरे समय के अनुसार 3G नेटवर्क आया जिसकी Carrier Frequency 5MHz और Operating Frequency 2100MHz होने के कारण 3MB तक की स्पीड देखने को मिला और 4G नेटवर्क की Operating Frequency 1800MHz ज्यादा होने के कारण आज 100MB तक का स्पीड देखने को मिलता है। 

लेकिन 5G में 2 Band देखने को मिलते है FR1 और FR2 जिसे Sub 6GHz और mm WAVE Band भी कहा जाता है जिसकी Frequency 24.25GHz से 52.6GHz, 4G से ज्यादा होने के कारण और भी हैवी रेडियो तरंगे वातावरण में छोड़ती है। 

नेटवर्क के हर जनरेशन में रेडियो तरंगो को बढ़ाया जा रहा है यह तरंगे हमारे लिए और पर्यावरण के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है लेकिन कैसे आइये जानते है संछेप में। 

Environment और इंसानी शरीर के लिए 5G कितना खतरनाक है?

विशेषज्ञो द्वारा कहा गया है की ये सभी रेडियो वेव और Frequency मनाव शरीर के लिए खतरनाक और कैंसर का कारण भी बन सकता है लेकिन उनका ये भी कहना है की नार्मल अभी तक खुले वातावरण में जितने भी रेडियो वेव ट्रेवल कर रहे है उनकी एक सिमा है जिससे इंसानी शरीर और पशु, पक्षियों को कोई खतरा नहीं होता। 

जब तक इन सभी रेडियो तरंगो के ट्रेवल की छमता कम होगी तब तक किसी की तरह से कोई खतरा नहीं है लेकिन जब रेडियो वेव को निश्चित सिमा से ज्यादा बढ़ाया जाये तब यह काफी हानिकारक साबित हो सकता है, आइये संछेप में जानते है दुनिया में उपलब्ध उपकरण के Frequency या रेडिओ वेव तरंगे कितनी है।  

5G रेडिओ तरंगो की X-Ray और Gamma-Ray Electromagnetic Wave से तुलना (5g से क्या नुकसान है)

कंप्यूटर, रेडियो, मोबाइल, ओवन, IR रिमोट कण्ट्रोल, विज़िबल प्रकाश, एक्स-रे, गामा-रे इन सभी से Electromagnetic Wave बहार निकलते है जिसमे से कुछ आपके लिए खतरनाक है और कुछ नहीं,

Electromagnetic Wave के Frequency की बात करे तो सबसे पहले कंप्यूटर आता है जिसकी Frequency 100Hz होती है जो की बिलकुल भी खतरनाक नहीं है और उसके बाद रेडियो, मोबाइल, ओवन, रिमोट कण्ट्रोल, 5G रेडिओ तरंग आता है जिसकी Frequency 300GHz से कम होती है,

Environment और इंसानी शरीर के लिए 5G कितना खतरनाक है?

यह भी नुकसान देह नहीं है लेकिन इन सभी के बाद Visible Light आती है (सूरज का प्रकाश) जो की 5G नेटवर्क से निकलने वाली तरंगो से ज्यादा खतरनाक होती है उसके बाद Ultraviolet-Rays, X-Ray, Gamma-Ray किरणे यह और भी खतरनाक और कैंसर का कारण भी बन सकता है, 

लेकिन इन सभी हाई Frequency वाले वेव का सामना हमें रोज नहीं करना पड़ता, किसी मेडिकल प्रॉब्लम की वजह से X-Ray करवाना पड़ता है इससे निकलने वाली किरणे मानव शरीर को भेद दिया करती है रोजाना X-Ray के संपर्क में आना भी बहुत खतरनाक है। 

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क्या 5G पशु, पक्षियों के लिए हानिकारक है?

सरकार ने Frequency Wave की एक निश्चित सिमा तय कर रखी है इस सिमा के अंदर 5G नेटवर्क भी आया करता है और 5G से किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है हलकी रिसर्च में पाया गया है यह तरंगे शरीर को थोड़ा गर्म कर सकती है लेकिन नुक़सान नहीं पंहुचा सकती। 

कुछ Myth की बात करने तो कुछ सालो पहले Netherland में पंछियो का एक बड़ा समूह मारा गया था जिसका कारण लोगो ने 5G टावर से निकलने वाले रेडिशन को बताया है बाद में रिसर्च के दौरान मालूम चला की यह 5G नेटवर्क के वजह से नहीं बल्कि कीटनाशक डाले गए नदियों का पानी पीने से इनकी मृत्यु हुए थी। 

5G टावर से सम्बंधित फ़ैल रहे Conspiracy Theory 

कुछ लोगो का कहना है 5G भारत में फ़ैल रहे महामारी का सबसे बड़ा कारण है 5G टावर से निकलने वाले रेडिशन मानव शरीर को कमजोर बना रहे है जिससे आज यह महामारी और तेजी से फ़ैल रही है लेकिन यह बात बिलकुल भी सत्य नहीं है 5G का इस महामारी से कोई लेना देना नहीं है। 

हालही में ऑनलाइन यह खबर फ़ैल रही है की लोगो को आपस में स्पर्श करने पर करंट लग रहा है हम आपको बता दे यह एक आम बात है इलेक्ट्रान और प्रोटोन में फेर बदल होने पर अक्सर ऐसा हुआ करता है ज्यादातर यह हमें सर्दियों के मौसम में देखने को मिलता है इसका भी 5G नेटवर्क से कोई लेना देना नहीं है।  

5G से क्या नुकसान है 

5G नेटवर्क का सबसे बड़ा नुकसान यह है की 5G की स्पीड ज्यादा होने के कारण बड़े देश के हैकर्स छोटे देशो के तंत्रो को हैक कर सकते और यह देश की सुरक्षा के लिए काफी बड़ा खतरा हो सकता है इसलिए आज अमेरिका, कोरिया, जापान, चीन जैसे देश 5G को लेकर सावधानी बरत रहे है ताकि भविष्य में उन्हें कोई परेशानी न हो।  

Frequently Asked Questions (5G के मिथक)

प्रश्न - क्या 5G नेटवर्क या 5G फ़ोन से साँस लेने में दिक्कत होती है?

जवाब - यह बात बिलकुल ही गलत है 5G से किसी भी प्रकार की बड़ी बीमारी या साँस लेने में दिक्कत नहीं होती। 

प्रश्न - क्या 5G की टेस्टिंग से मोबाइल फ़ोन ब्लास्ट हो जायेगा?

जवाब - जी नहीं 5G नेटवर्क या उसकी टेस्टिंग से किसी भी कंपनी का मोबाइल फ़ोन ब्लास्ट नहीं होगा।   

निष्कर्ष 

उम्मीद करता हू इस लेख को पढ़ कर यह समझ गए होंगें की Environment और इंसानी शरीर के लिए 5G कितना खतरनाक है? अगर अभी भी 5G से सम्बंधित कोई सवाल हो तो कमेंट करके पूछे जल्द से जल्द आपके सवालों का जवाब दिया जायेगा। 

इसी तरह की तकनिकी से सम्बंधित ज्ञान पाने और टिप्स एंड ट्रिक्स के लिए हमारे ब्लॉग infotechindi.com ओर सोशल हैंडल को फॉलो करे आपका धन्यवाद।  

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