All Best types of mobile display screen in hindi 2020 - मोबाइल डिस्प्ले के प्रकार|

Types of mobile display screen के बारे में जानना ओर भी जरूरी हो जाता है जब हम नया smartphone लेना चाहते है, बहुत से लोग जब नए फोन लेने जाते है या ऑनलाइन खरीदते है तो वे मोबाईल के फीचर्स कैमरा प्रॉसेसर ओर लूक को देख कर पसंद करते है जबकि फोन में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाले चीज डिस्प्ले ही होती है अगर डिस्प्ले अच्छा नहीं होगा तो आपको विडियो, gaming में अच्छा experience नहीं मिलेगा, अगली बार जब नए smartphone लेने जाए तो ये भी देख ले की किस प्रकार का डिस्प्ले आपके लिए अच्छा रहेगा,

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आज मार्केट में तरह तरह के डिस्प्ले आ गए है, जिससे कुछ लोग इस कन्फ्यूजन में होते है किस types of mobile display screen वाला स्मार्टफोन ले, इन डिस्प्ले का उपयोग टीवी, लैपटाप, computer, mobile phone, ipad, digital watch, smartwatch और बहुत से प्रोडक्ट्स में किया जाता है,

तो आज हम सभी डिस्प्ले को पूरी डिटेल में बताएंगे ओर हम सिर्फ उन्हीं डिस्प्ले के बारे में बताएंगे जो ज्यादातर स्मार्टफोन में इस्तेमाल किया जाता है या आज के समय में बहुत चर्चित है।

All best types of mobile display screen


#1 LCD (liquid crystal display)

किसी भी तरह के डिस्प्ले में इन तीन चीज़ों का होना बहुत जरूरी होता है पहला ये की डिस्प्ले को रोशनी प्रदान करने के लिए एक लाईट जिससे कि डिस्प्ले को देखा जा सके ओर दूसरा कलर्स ये आपको डिस्प्ले में कलर्स दिखाएगी अगर कलर्स नहीं होंगे तो पूरी स्क्रीन सफेद दिखाई देगी या काली इसलिए डिस्प्ले में कलर्स का होना बहुत जरूरी है ओर तीसरी चीज ये है कि कैसे लाईट ओर कलर्स को नियंत्रित कर पाएं,

एलसीडी डिस्प्ले काम कैसे करता है, जैसे कि एलसीडी के नाम लिक्वीड क्रिस्टल से ही लगता है कि ये लिक्विड फॉर्म में होगा, लेकिन ऐसा नहीं होता एलसीडी डिस्प्ले के गुण ना तो सॉलिड होता है ना ही लिक्विड ये इन दोनों के बीच में आने वाले प्रॉपर्टीज का ही एक गुण होता है जिसका गुण crystalline solid से मिलता जुलता है इसमें molecules का arengment एक perticular pattern में मिलता है,

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Crystal liquids

लिक्विड क्रिस्टल किसी भी आकार में फिक्स नहीं होता ना ही सॉलिड होता है लिक्विड क्रिस्टल बहुत प्रकार के होते है nematic or smectic, display को देखने के लिए twisted nematic कि जरूरत पड़ती है इसकी वजह से जब लाईट गुजरती है तो 90' एंगल में twist हो जाता है,

ओर हम आपको बता दे की सुरज से आने वाली किरण non-polerised होता है जिसके कारण सुरज से आने वाली किरण टेढ़ी मेढ़ी दिखाई पड़ती है अगर हम इन किरणों के बीच vertical polerised filter लगा दे तो हमे सिर्फ vertical lights हि देखने को मिलता है, 

एलसीडी डिस्प्ले में एक backlight लगा होता है ठीक उसके उपर polerised फिल्टर लगा होता है उदाहरण के तौर पर एक वर्टिकल polerised फिल्टर लगा देते है तो इससे निकलने वाला लाईट्स vertical हि होता लेकिन जब ये लिक्विड क्रिस्टल से होकर गुजरती तो 90' एंगल में twist होकर horizontal lights में परिवर्तित हो जाता है ओर फिर horizontal polerised filter से पास होकर हमे दिखाई देती है,

लेकिन जब लिक्विड क्रिस्टल में वॉल्टेज apply करते हैं तो twisted मैकेनिज्म काम करना बंद कर देती है इस वजह से वर्टिकल polerised से आने वाली किरण भी आगे वर्टिकल फॉर्म में ही गुजरती है ओर आगे लगा हुआ horizontal polerised filter, vertical lights को ब्लॉक कर देता है जिस वजह से लाईट आगे जा नहीं पाती ओर हमे दिखाई नहीं देती,

एलसीडी डिस्प्ले के pixel में तीन सब pixel होते हैं लाल, हरा, नीला जो आपस में मिलकर 16m नय कलर्स दिखाते है साथ ही इनमें एक कलर् फिल्टर लगा होता है जिसकी वजह से पिक्सेल को वॉल्टेज देकर नियंत्रित कर सकते है की वह कितना लाईट पास करेगा ओर कितना नहीं,

एलसीडी डिस्प्ले आपको ज्यादातर स्मार्टफोन्स में देखने को मिल जाते है, यह अमोल्ड डिस्प्ले के मुकाबले ज्यादा सस्ता ओर अच्छी ब्राइटनेस के साथ आता है एलसीडी डिस्प्ले के पिक्सल में अपना खुद का लाईट नहीं होता बल्कि एक backlight लगा होता है जिससे यह डिस्प्ले वाला स्मारटफोन ओलेड डिस्प्ले से ज्यादा बैटरी खर्च करता है।

#2 TFT (Thin film transistor)

Tft display का फूल फोरम थिन फ़िल्म ट्रांजिस्टर होता है ये डिस्प्ले एलसीडी का ही अगला वर्जन है इस डिस्प्ले का उपयोग पहले के स्मार्टफोन ओर आज के सस्ते फोंस में किया जाता है क्योंकि tft डिस्प्ले ओरो के मुकाबले काफी सस्ता देखने को मिल जाता है tft डिस्प्ले की मोटाई थोड़ी ज्यादा होने के कारण मोबाईल फोन के साइज में भी फर्क आ जाता है,

Tft डिस्प्ले के pixel में हमे इलेक्ट्रोड देखने को मिलता है जिसके कारण ना तो अच्छे कलर्स देखने को मिलते है ना ही अच्छी व्यू एंगल देखने को मिलता है, जिसके कारण डिस्प्ले को थोड़ा भी टिल्ट करने पर डिस्प्ले अच्छे से दिखाई नहीं देते,

यह डिस्प्ले सस्ते होने के साथ काफी सस्ते क्वालिटी ओर कलर्स भी अच्छे नहीं दिखाते, अगर आप नए फोन लेने जाए तो पहले ये सुनिश्चित कर लें कि स्मार्टफोन tft डिस्प्ले वाला ना हो, tft डिस्प्ले थोड़ा फिका और विडियो वगेरह का अनुभव ठीक से नहीं ले पाएंगे, और ये डिस्प्ले जल्दी टूट भी जाता है।

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#3 IPS-LCD (in plane switching liquid crystal display)

आईपीएस एलसीडी ये एलसीडी का ही एक रूप है इसमें भी वही टेक्नोलॉजी काम करती है जो एलसीडी डिस्प्ले में करती थी, यह डिस्प्ले आज के इस दौर में बहुत प्रचलन में है क्योंकि ये amoled display कि अपेक्षा सस्ते ओर कलर्स को बहुत ही नेचुरल दिखाते है,

जबकि amoled display में कलर्स ज्यादा boosted और over saturated देखने को मिलता है अगर आप अपने स्मार्टफोन में accurate colours देखना चाहते है तो आपको आईपीएस एलसीडी डिस्प्ले की तरफ जाना चाहिए, इस डिस्प्ले में भी एक बैकलाइट होता है जिसकी वजह से सुरज के तेज किरणों में भी इस डिस्प्ले को बिना किसी परेशानी के क्लियर देख पाएंगे, ओर व्यू एंगल को भी बढ़ाया गया है यानी की आप जब फोन को थोड़ा टिल्ट भी करते है तो ठीक से देख पायेंगे,

यह डिस्प्ले भी एमोलेड से सस्ती ओर tft डिस्प्ले से थोड़ा महंगा मिल जाता है ओर अमोल्ड से थोड़ा कम ओर tft से थोड़ा सा मोटा डिस्प्ले देखने मिलता है जिसके कारण स्मार्टफोन भी थोड़े हैवी हो जाते है इस डिस्प्ले का डॉउन प्वाइंट यह है कि ये बैकलाइट टेक्नोलॉजी पे काम करता है जिससे बैटरी भी ज्यादा खर्च करती है ओर ब्लैक कलर को ब्लैक के बजाए थोड़ा ग्रे कलर में दिखाता है।

#4 OLED (organic light emitting diode)

OLED display यानी कि ऑर्गेनिक लाईट एमिटिंग डायोड , ये डिस्प्ले उपर के तीनों डिस्प्ले से अच्छा कलर्स दिखता है इस वजह से महंगा भी है, ओलेड डिस्प्ले पतली होने के साथ साथ इसका व्यू एंगल भी काफी अच्छा होता है, 

अभी तक के सारे डिस्प्ले एलसीडी टेक्नोलॉजी पे काम करते थे लेकिन इसका मैकेनिज्म थोड़ा अलग है ओलेड में आपको कोई भी बैकलाइट नहीं मिलती जिसके कारण हल्का ओर पतला मिल जाता है।

#5 AMOLED (active matrix organic light emitting diode)

अमोल्ड डिस्प्ले, ओलेड का ही एक एडवांस वर्जन है दोनों एक ही मैकेनिज्म पे काम करते है इन डिस्प्लेस में बैकलाइट नहीं होती इसके हर पिक्सल्स में खुद का एक ट्रांजिस्टर लगा होता है जिसके कारण डिस्प्ले के जिन जगहों पे कलर्स की जरूर होती पिक्सल्स वहीं के लाईट को ऑन करते है,

बाकी जहा के लाईट्स की जरूरत नहीं होती वहां के pixels ऑन ही नहीं होते जिस कारण ब्लैक कलर्स बिलकुल ब्लैक लगते है ओर इस तकनीक के कारण बैटरी कम खर्च करती है,

AMOLED display मे colours natural तो नहीं मिलते लेकिन थोड़ा वाइब्रेंट ओर ओवर saturated रंग देखने को मिलता है जो हमारे इंसानी आंखो को बहुत अच्छा लगता है साथ ही ये डिस्प्ले बहुत ही लचीली होने के कारण जल्दी टूटती नहीं अगर टूट जाए तो ठीक करना काफी महंगा पड़ सकता है।

#6 RETINA DISPLAY

रेटीना डिस्प्ले हमे एप्पल के प्रोडक्ट्स आईफोन, मैकबुक, आईपैड, आइपॉड, एप्पल वॉच में देखने को मिलता है, एप्पल इस डिस्प्ले को रेटीना डिस्प्ले केह कर बुलाता है जो कि बस एक मार्केटिंग टर्म है ये भी एक आईपीएस डिस्प्ले जैसा ही स्क्रीन होता है जिसमें आपको ज्यादा पिक्सल्स मिल जाते है,
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Retina display
एप्पल ने पहली बार इस डिस्प्ले को आईफोन 4 में दिखाया था जिसमें पर इंच 300ppi हुआ करती थी जिससे यह ओर भी क्लियर देखने को मिलता है, pixels density ज्यादा होने के कारण रेटीना डिस्प्ले आंखो को ओर भी ज्यादा अच्छा लगता है ओर आंखो को चुभन नहीं होती और काफी मेहंगा मिलता है।

#7 SUPER AMOLED

Super Amoled display और अमोल्ड दोनों ही सेम मैकेनिज्म पर काम करता है लेकिन ये अपने हो ओलेड और अमोल्ड से ओर भी बेहतर कलर्स ओर व्यू एंगल प्रदान करता है, अमोल्ड डिस्प्ले में यह सबसे कम बैटरी खर्च ओर सुरज के किरणों में भी ज्यादा अच्छे से दिखाई देता है,

यह डिस्प्ले types of mobile display screen में सबसे अच्छा माना गया है साथ ही ये महंगा होने के कारण इसका उपयोग  ज्यादातर फ्लैगशिप स्मार्टफोन में किया जाता है अगर आपको अपने विडियो, पिक्चर क्वालिटी को और भी अच्छा बनाना हो तो आप एक बार सुपर अमोल्ड डिस्प्ले को जरूर ट्राई करें इसका टच रिस्पॉस भी काफी अच्छा है।

सही डिस्प्ले का चुनाव कैसे करें

हमने आपको बहुत से डिस्प्ले के बारे में बता दिया लेकिन अभी भी बहुत से लोग इस कन्फ्यूजन में होंगे कि कोन सा types of mobile display screen वाला फोन ले, अगर आपके मन में भी ऐसा सवाल है तो चिंता ना करें हम आपको आपके उपयोग के हिसाब से सही डिस्प्ले के बारे में बताएंगे,

अगर आपको काफी सस्ते फोन चाहिए जैसे 3000, 4000rs के अंदर तो आप tft डिस्प्ले की और ही जाए क्योंकि इस प्राइस रेंज में कोई ओर डिस्प्ले का ऑप्शन भी नहीं है इस tft डिस्प्ले में आपको ठीक ठाक ही experince मिलेगा,

अगर आपकी बजट 10k से उपर है तो आप आईपीएस एलसीडी की ओर जाएं क्योंकि इस price range में आपको एमोलेड डिस्प्ले काफी मुश्किल से मिलता है अगर मिलता भी है तो उसके बाकी के फीचर्स अच्छे नहीं होते जब आपको एमोलेड डिस्प्ले के साथ अच्छे फीचर्स वाले फोन मिलते है तो उस फोन को लेना सही चॉइस होगा, ओर आईपीएस डिस्प्ले आपको तब भी लेना चाहिए जब आपको बिलकुल नेचुरल कलर देखना हो, यह डिस्प्ले आपको बाकी सभी डिस्प्ले से अच्छा रंग दिखता है जो कि हम अपने खुले आंखो से देखते है,

25000rs के उपर का बजट है तो आप अमोल्ड, सुपर एमोलेड ओर रेटीना डिस्प्ले की और जा सकते है क्योंकि ये सारे डिस्प्ले बैटरी कम खपत करता है साथ ही वाइब्रेंट कलर दिखता है जो कि आंखो को बहोत अच्छे लगते है ये सारे डिस्प्ले आंखो के लिए भी बेस्ट होते है।

स्मार्टफोन डिस्प्ले को कैसे प्रोटेक्ट करें

दोस्तों हमने तो एक अच्छी डिस्प्ले स्क्रीन वाला फोन तो ले लिया लेकिन अब भी यह देख ले की फोन में को सा बचाव वाला ग्लास लगा हुआ है, मार्केट में आपको बहोत से ग्लास मिल जाएंगे लेकिन आज हम बस 2 protect glass के बारे में बताएंगे जो बोहोत ही हार्ड ओर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले है,

#1 GORILAA GLASS 

इस ग्लास का उपयोग पहली बार 2007 में आईफोन में किया गया था, गोरिल्ला ग्लास बनाने वाली कंपनी corning कभी ये नहीं कहती की हमारे ग्लास में स्क्रैच नहीं आएगा ये ग्लास काफी हद तक आपके डिस्प्ले में स्क्रैच आने से रोकती है लेकिन बिलकुल भी स्क्रैच ना आए ऐसा संभव नहीं है,

ऐसा क्यों होता है ये जानने के लिए आपको हार्डनेस स्केल के बारे में जानना होगा, इसमें 0 से 10 नंबर तक हार्ड मटेरियल होते है 0 का मतलब कम हार्ड ओर 10 का मतलब बोहोत ज्यादा हार्ड वाली चीज जैसे की डायमंड, गोरिल्ला ग्लास 6.5 नंबर तक के हार्ड मटेरियल को झेल सकती है यानी की 6.5 के उपर के मटेरियल से स्क्रैच अा जाता हैं जैसे रेत के कड़ से आसानी से स्क्रैच अा जाता है,
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Scratchs
लेकिन 6.5 से नीचे आने वाले मटेरियल जैसे चाबी ओर सिक्के से स्क्रैच नहीं आता, ये ग्लास स्क्रैच रेसिस्टेंट होते है ना कि स्क्रैच प्रूफ, ये सारे ग्लास मोबाईल फोन्स, स्मार्ट वॉच, लैपटॉप, टीवी यहां तक की कार में भी देखने को मिल जाता है,

गोरिल्ला ग्लास 4,5,6 सभी में 6.5 तक का ही हार्डनेस मिलता है बस समय के साथ ग्लास पहले से और पतले होते जा रहे है जो स्मार्टफोन्स के लिए अच्छा है,


#2 DRAGON TRAIL 

ड्रैगन ट्रेल ग्लास एक japanese company AASHI के तरफ से आने वाला एक ग्लास है ये ग्लास गोरिल्ला ग्लास जितना चर्चित तो नहीं है लेकिन गोरिल्ला ग्लास जितना मजबूत होता है, ओर इस ग्लास का इस्तेमाल ज्यादातर स्मार्टफोन्स में ही किया जाता है।

निष्कर्ष

इतना सब जानने के बाद भी आपके मन में ये ख्याल आता होगा कि मेरा फोन तो गोरिल्ल ग्लास या ड्रैगन ट्रेल ग्लास से पूरी तरह सुरक्षित है तो अब मुझे temperd ग्लास लगवाना चाहिए या नहीं तो हा आपको जरूर एक अच्छा temperd ग्लास लगवाना चाहिए इसकी वजह से आपका डिस्प्ले कई बार स्क्रैच ओर टूटने से बच जाएगा।



इसी प्रकार के और जानकारी पाने के लिए हमसे जुड़े रहे,
आपका धन्यवाद्।
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1 comments:

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babi
admin
11 July 2020 at 22:39 × This comment has been removed by a blog administrator.
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